संदेश

हम चाहते ही नहीं मोहब्बत हो जाये मोहन मुंतजिर

 हम चाहते ही नहीं मोहब्बत हो जाये, करोगी मोहब्बत तो चेहरे पर उदासी छाएगी जो छाएगी उदासी तो तुझे नींद ना आएगी नींद न आएगी तो चेहरे पर असर आएगा चेहरे पर असर आएगा तो तू नजरे चुरायेगा फिर जाने कब तलक हमसे मिलने ना आयेगा तू मिलने न आये हमसे ऐसी नोबत ही क्यों आये हम चाहते ही नही मोहब्बत हो जाये करोगी मोहब्बत तो कुछ यूँ मोहब्बत होगी कभी शक होगा मुझपे कभी शिकायत होगी जिनसे बास्ता नहीं उनसे अदावत होगी शहर से नफरत दुनिया से बगावत होगी हम सह जायेंगे तुम न सह पाओगी कैसे जमाने के सितम उठाओगी समझायेंगे घर बाले तो मुझसे खफा हो जाओगी मैं तन्हा रह जाऊंगा तुम बेबफा हो जाओगी तुम हो जाओ बेबफा ऐसी नोवत ही क्यों आये हम चाहते ही नहीं मोहब्बत हो जाये करोगी मोहब्बत तो इज़हार भी करना होगा ज़माने से छुपकर प्यार भी करना होगा तुझपर पड़ने लगेंगी दुनिया की नजरें मुझपर रहने लगेंगी दुनिया की नजरे फिर देखना तुम ये समझोता कर लोगी हमें छोड़कर इश्क दूसरा कर लोगी वो तुम्हे मिल जायेगा तुम खूबसूरत हो ख्वाहिश हो सबकी हसीन सूरत हो आहिस्ता -2 तेरी उम्र खफा हो जाएगी तेर...

Bnmu part 3 2019 exam date

*🚨🚨🚨 (Notice) 🚨🚨🚨* बीएन मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा  के अंतर्गत सभी कॉलेजों में पार्ट 3   सत्र 2016-19 में छूटे हुए छात्र छात्राओं का नामांकन एवं परीक्षा फॉर्म दिनांक, 08.12.2019 तक विलंब शुल्क के साथ भरा जाएगा वैसे छात्र छात्राओं जो किसी कारणवश उसका रिजल्ट पेंडिंग था प्रमोटेड था *आदेशानुसार* *प्रति कुलपति महोदय*  *द्वारा - परीक्षा नियंत्रक महोदय*

गाँधी वध और उस राह की अनकही कहानी नकली गांधीवादियों का असली चेहरा

इस देश के "सिकलुर" और "बौद्धिक आतंकवादियों" के हमेशा राष्ट्रवादी विचारधारा पर हमला करने के लिए मौका चाहिए होता है... आज इन्होने फायदा उठाया 2 अक्टूबर यानि गांधी जयंति का... सुबह से सोशल मीडिया पर देख रहा हूं कि बापू और उनकी विचारधारा के नाम पर ये सिकलुर गैंग देश में उत्साह का माहौल बनाने के बजाय मनहूसियत फैलाने का काम कर रहा है... ये साबित करने की कोशिश की जा रही है कि ये पूरा देश बापू और उनके विचारों का कातिल बन चुका है... इतना ही नहीं इन लोगों ने राष्ट्रवादी विचारधारा के हर व्यक्ति को गोडसे से जोड़ने की कोशिश की... मैंने ये पहले भी लिखा था आज फिर लिख रहा हूं... दरअसल गांधी के नाम पर इस तरह की वैचारिक, शारीरिक, नस्लीय हिंसा की शुरुआत तो इन कथित गांधीवादियों ने बापू की मौत के 5 घंटे बाद ही शुरु कर दी थी... आज गोडसे के नाम पर हिंदू धर्म को बदनाम किया जा रहा है लेकिन 1948 में तो गोडसे के गुनाह के बदले 8 हज़ार मासूम लोगों की जान तक ले ली गई थी... इस देश में मेरठ, भागलपुर, गुजरात दंगों का रिकॉर्ड तो मौजूद हैं लेकिन 1948 में कथित गांधीवादियों के पाप के निशान तो इतिहास...

मैंने गांधी को क्यों मारा गाँधी वध नाथूराम गोडसे

Supreme Court से अनुमति मिलने पर प्रकाशित की गयी है.... 60 साल तक भारत में प्रतिबंधित रहा नाथूराम का अंतिम भाषण - *“मैंने गांधी को क्यों मारा”* 👉 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोड़से ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी लेकिन नाथूराम गोड़से घटना स्थल से फरार नही हुआ बल्कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया l नाथूराम गोड़से समेत 17 अभियुक्तों पर गांधी जी की हत्या का मुकदमा चलाया गया l इस मुकदमे की सुनवाई के दरम्यान न्यायमूर्ति खोसला से नाथूराम ने अपना वक्तव्य स्वयं पढ़ कर जनता को सुनाने की अनुमति माँगी थी जिसे न्यायमूर्ति ने स्वीकार कर लिया था पर यह Court परिसर तक ही सिमित रह गयी क्योकि सरकार ने नाथूराम के इस वक्तव्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया था लेकिन नाथूराम के छोटे भाई और गांधी जी की हत्या के सह-अभियोगी गोपाल गोड़से ने 60 साल की लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट में विजय प्राप्त की और नाथूराम का वक्तव्य प्रकाशित किया गया l *“मैंने गांधी को क्यों मारा”*  नाथूराम गोड़से ने गांधी हत्या के पक्ष में अपनी 150 दलीलें न्यायलय के समक्ष प्रस्तुति की ll “नाथूराम गोड़से के वक्तव्य के कु...

बाढ़ नहीं है, *प्रकृति का प्रहार* है ये

बाढ़ नहीं है, *प्रकृति का प्रहार* है ये बाढ़ नहीं है, *प्रकृति का प्रहार* है ये, चिंता की कोई बात नहीं है, *बिहार* है ये. कभी *तलवार*, कभी गोली, कभी बम, एक से एक बढ़कर आते हैं *सितम*. किसी भी *आपदा के लिए तैयार* है ये, *चिंता की कोई बात नहीं है, बिहार है ये.* कभी *जग्गू, कभी कर्पूरी, कभी सतीश,* कभी *लालू* कभी *माँझी* कभी *नीतीश.* हर कोई *बिहार पर आपदा* बनकर आया, कोई *बिहार का कुछ नहीं बिगाड़* पाया. हर *जाति को मौका* देने को तैयार है ये, *चिंता की कोई बात नहीं है, बिहार है ये.* *बाढ़ बिहार के लिए* कोई नई *बात* नहीं है, हर बरस आती है, *हज़ारों गाँव डुबाती* है. अबकी *पटना डूबा*, इसीलिए *हाहाकार* है ये, *चिंता की कोई बात नहीं है, बिहार है ये.* गाँव वाले *बिहारियों को तैरना* आता है, *शहरी मीडिया* उधर जा ही नहीं पाता है. जब *रिपोर्टर कैमरा* सहित ही *डूब* जाएगा, तो भला *बाढ़ की खबर* कैसे बता पाएगा? *हवाई यात्रा* वाले *पटना में लैंड* तो कर जा रहे हैं, लेकिन *एयरपोर्ट से निकल* ही नहीं पा रहे हैं. इसीलिए इसबार *ज्यादा प्रचार प्रसार* है, *पर चिंता की कोई बात नहीं, ये बिहा...

कालिदास! सच-सच बतलाना/बाबा नागार्जुन

कालिदास! सच-सच बतलाना  इन्दुमती के मृत्युशोक से  अज रोया या तुम रोये थे?  कालिदास! सच-सच बतलाना!  शिवजी की तीसरी आँख से  निकली हुई महाज्वाला में  घृत-मिश्रित सूखी समिधा-सम  कामदेव जब भस्म हो गया  रति का क्रंदन सुन आँसू से  तुमने ही तो दृग धोये थे  कालिदास! सच-सच बतलाना  रति रोयी या तुम रोये थे?  वर्षा ऋतु की स्निग्ध भूमिका  प्रथम दिवस आषाढ़ मास का  देख गगन में श्याम घन-घटा  विधुर यक्ष का मन जब उचटा  खड़े-खड़े तब हाथ जोड़कर  चित्रकूट से सुभग शिखर पर  उस बेचारे ने भेजा था  जिनके ही द्वारा संदेशा  उन पुष्करावर्त मेघों का  साथी बनकर उड़ने वाले  कालिदास! सच-सच बतलाना  पर पीड़ा से पूर-पूर हो  थक-थककर औ' चूर-चूर हो  अमल-धवल गिरि के शिखरों पर  प्रियवर! तुम कब तक सोये थे?  रोया यक्ष कि तुम रोये थे!  कालिदास! सच-सच बतलाना!                                       ...

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए/दुष्यंत कुमार

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए। आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी, शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए। हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में, हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए। सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए। दुष्यंत कुमार