गाँधी वध और उस राह की अनकही कहानी नकली गांधीवादियों का असली चेहरा
इस देश के "सिकलुर" और "बौद्धिक आतंकवादियों" के हमेशा राष्ट्रवादी विचारधारा पर हमला करने के लिए मौका चाहिए होता है... आज इन्होने फायदा उठाया 2 अक्टूबर यानि गांधी जयंति का... सुबह से सोशल मीडिया पर देख रहा हूं कि बापू और उनकी विचारधारा के नाम पर ये सिकलुर गैंग देश में उत्साह का माहौल बनाने के बजाय मनहूसियत फैलाने का काम कर रहा है... ये साबित करने की कोशिश की जा रही है कि ये पूरा देश बापू और उनके विचारों का कातिल बन चुका है... इतना ही नहीं इन लोगों ने राष्ट्रवादी विचारधारा के हर व्यक्ति को गोडसे से जोड़ने की कोशिश की... मैंने ये पहले भी लिखा था आज फिर लिख रहा हूं... दरअसल गांधी के नाम पर इस तरह की वैचारिक, शारीरिक, नस्लीय हिंसा की शुरुआत तो इन कथित गांधीवादियों ने बापू की मौत के 5 घंटे बाद ही शुरु कर दी थी... आज गोडसे के नाम पर हिंदू धर्म को बदनाम किया जा रहा है लेकिन 1948 में तो गोडसे के गुनाह के बदले 8 हज़ार मासूम लोगों की जान तक ले ली गई थी... इस देश में मेरठ, भागलपुर, गुजरात दंगों का रिकॉर्ड तो मौजूद हैं लेकिन 1948 में कथित गांधीवादियों के पाप के निशान तो इतिहास...