संदेश

जून, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

धर्म से जुड़ी जानने योग्य जानकारी

।। कुछ जानने योग्य जानकारियां ।। पूजा साधना करते समय बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन पर सामान्यतः हमारा ध्यान नही जाता है लेकिन पूजा साधना की द्रष्टि से ये बातें अति महत्वपूर्ण हैं | ◆ गणेशजी को तुलसी का पत्र छोड़कर सब पत्र प्रिय हैं | भैरव की पूजा में तुलसी का ग्रहण नही है| ◆ बिना स्नान किये जो तुलसी पत्र जो तोड़ता है उसे देवता स्वीकार नही करते | ◆ रविवार को दूर्वा नही तोडनी चाहिए | ◆ केतकी पुष्प शिव को नही चढ़ाना चाहिए | ◆ केतकी पुष्प से कार्तिक माह में विष्णु की पूजा अवश्य करें | ◆ देवताओं के सामने प्रज्जवलित दीप को बुझाना नही चाहिए | ◆ जो मूर्ति स्थापित हो उसमे आवाहन और विसर्जन नही होता | ◆ पूजा करते समय यदि गुरुदेव ,ज्येष्ठ व्यक्ति या पूज्य व्यक्ति आ जाए तो उनको उठ कर प्रणाम कर उनकी आज्ञा से शेष कर्म को समाप्त करें | ◆ मिट्टी की मूर्ति का आवाहन और विसर्जन होता है और अंत में शास्त्रीयविधि से गंगा प्रवाह भी किया जाता है | ◆ कमल को पांच रात ,बिल्वपत्र को दस रात और तुलसी को ग्यारह रात बाद शुद्ध करके पूजन के कार्य में लिया जा सकता है | ◆ पंचामृत में यदि सब वस्तु प्...

चरणामृत का महत्व

चरणामृत का महत्व 👣💧* 👣💧👣💧👣💧👣💧👣 अक्सर जब हम मंदिर जाते है तो पंडित जी हमें भगवान का चरणामृत देते है, क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश की कि चरणामृतका क्या महत्व है, 📚❋━━► शास्त्रों में कहा गया है अकालमृत्युहरणं सर्वव्याधिविनाशनम्। विष्णो: पादोदकं पीत्वा पुनर्जन्म न विद्यते ।। 📖"अर्थात भगवान विष्णु के चरण का अमृत रूपी जल समस्त पाप -व्याधियों का शमन करने वाला है तथा औषधी के समान है। 💧जो चरणामृत पीता है उसका पुनः जन्म नहीं होता" जल तब तक जल ही रहता है जब तक भगवान के चरणों से नहीं लगता, जैसे ही भगवान के चरणों से लगा तो अमृत रूप हो गया और चरणामृत बन जाता है. ❋━━► जब भगवान का वामन अवतार हुआ, और वे राजा बलि की यज्ञ शाला में दान लेने गए तब उन्होंने तीन पग में तीन लोक नाप लिए जब उन्होंने पहले पग में नीचे के लोक नाप लिए और दूसरे में ऊपर के लोक नापने लगे तो जैसे ही ब्रह्म लोक में उनका चरण गया तो ब्रह्मा जी ने अपने कमंडलु में से जल लेकर भगवान के चरण धोए और फिर चरणामृत को वापस अपने कमंडल में रख लिया, 💧वह चरणामृत गंगा जी बन गई, जो आज भी सारी दुनिया के पापों क...

नारियल(श्री फल) का राज़ जो स्त्री से संबंधित है..

इस कारण स्त्रियां कभी नहीं फोड़ती है नारियल नारियल को श्रीफल के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है की जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया तो वे अपने साथ तीन चीजें- लक्ष्मी, नारियल का वृक्ष तथा कामधेनु लाए इसलिए नारियल के वृक्ष को श्रीफल भी कहा जाता है। श्री का अर्थ है लक्ष्मी अर्थात नारियल लक्ष्मी व विष्णु का फल। नारियल में त्रिदेव अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना गया है। श्रीफल भगवान शिव का परम प्रिय फल है। मान्यता अनुसार नारियल में बनी तीन आंखों को त्रिनेत्र के रूप में देखा जाता है। श्रीफल खाने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है। इष्ट को नारियल चढ़ाने से धन संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं। भारतीय पूजन पद्धति में नारियल अर्थात श्रीफल का महत्वपूर्ण स्थान है। कोई भी वैदिक या दैविक पूजन प्रणाली श्रीफल के बलिदान के बिना अधूरी मानी जाती है। यह भी एक तथ्य है कि महिलाएं नारियल नहीं फोड़तीं। श्रीफल बीज रूप है, इसलिए इसे उत्पादन अर्थात प्रजनन का कारक माना जाता है। श्रीफल को प्रजनन क्षमता से जोड़ा गया है। स्त्रियों बीज रूप से ही शिशु को जन्म देती हैं और इसलिए नारी के लिए ...

वास्तु के 7 घोड़ों के महत्व

वास्तु में 7 घोड़ों के महत्व वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर आप अपने घर या दफ्तर में दौड़ते हुए घोड़े की तस्वीर लगाते हैं, तो यह आपके कार्य में गति प्रदान करता है. दौड़ते हुए घोड़े सफलता, प्रगति और ताकत के प्रतीक होते हैं. खासकर 7 दौड़ते हुए घोड़े व्यवसाय की प्रगति का सूचक माने गए हैं, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार 7 अंक सार्वभौमिक है, प्राकृतिक है. व्यापार में प्रगति के लिए अपने ऑफिस की केबिन में 7 दौड़ते हुए घोड़ों की तस्वीर लगाएं. इन तस्वीरों को लगाते हुए इस बात का ध्यान रखें कि घोड़ों का मुंह ऑफिस के अंदर की ओर आते हुए होना चाहिए और दक्षिण दीवार पर तस्वीर लगानी चाहिए. दोस्तों दौड़ते हुए घोड़े प्रगति के प्रतीक होते हैं. ये कार्य में गति प्रदान करते हैं और जो व्यक्ति बार – बार इन घोड़ों को देखता है, इसका सीधा असर व्यक्ति की कार्यप्रणाली पर पड़ता है. अतः ये घोड़े आपके कार्य में गति प्रदान कर सफलता दिलाने में मददगार साबित होंगे. 7 घोड़ों की तस्वीर घर में लगाने से जीवन में धन संबंधी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलते. स्थाई रूप से घर में लक्ष्मी का निवास होता है. इसके लिए घर ...

तुलसी के गुण का वर्णन

🌱तुलसी🌱 🌱गले में तुलसी की माला धारण करने से जीवनशक्ति बढ़ती है, बहुत से रोगों से मुक्ति मिलती है। तुलसी की माला पर भगवन्नाम-जप करना कल्याणकारी है। 🌱मृत्यु के समय मृतक के मुख में तुलसी के पत्तों का जल डालने से वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के लोक में जाता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंडः 21.42) 🌱तुलसी के पत्ते सूर्योदय के पश्चात ही तोड़ें। दूध में तुलसी के पत्ते नहीं डालने चाहिए तथा दूध के साथ खाने भी नहीं चाहिए। घर की किसी भी दिशा में तुलसी का पौधा लगाना शुभ व आरोग्यरक्षक है। पूर्णिमा, अमावस्या, द्वादशी और सूर्य-सक्रान्ति के दिन, मध्याह्नकाल, रात्रि, दोनों संध्याओं के समय और अशौच के समय, तेल लगा के, नहाये धोये बिना जो मनुष्य तुलसी का पत्ता तोड़ता है, वह मानो भगवान श्रीहरि का मस्तक छेदन करता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंडः 21.50.51) 🌱रोज सुबह खाली पेट तुलसी के पाँच-सात पतो का सेवन करे और ऊपर से ताँबे के बर्तन में रात का रखा एक गिलास पानी पियें। इस प्रयोग से बहुत लाभ होता है। यह ध्यान रखें कि तुलसी के पत्तों के कण दाँतों के बीच न रह जायें। ...